NEET PG के नए कटऑफ पर मचा बवाल

“जीरो से नीचे वाला भी हीरो?” — क्या प्राइवेट कॉलेजों की सीटें भरने के लिए घटाया गया कटऑफ?

NEET PG के नए कटऑफ पर मचा बवाल

नई दिल्ली।

NEET PG के ताज़ा कटऑफ में की गई कमी को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई है। कई छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की खाली सीटें भरने के लिए कटऑफ को असामान्य रूप से कम किया गया है। सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं—“क्या अब कम अंक पाने वाले भी स्पेशलिस्ट कहलाएंगे?”

क्या है मामला?

सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष कुछ श्रेणियों में क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल में उल्लेखनीय कमी की गई है। आलोचकों का कहना है कि इससे ऐसे अभ्यर्थियों को भी प्रवेश मिल सकता है जिनके अंक बेहद कम हैं। हालांकि आधिकारिक बयान में इसे “सीटों की उपलब्धता और अवसर की समानता” से जोड़ा गया है।

छात्रों की प्रतिक्रिया

कुछ अभ्यर्थियों का कहना है कि मेहनत से अच्छे अंक लाने वालों के साथ यह अन्याय है। एक छात्र ने कहा,

“अगर क्वालिटी से समझौता होगा तो भविष्य में मरीजों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।”

वहीं दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि

“कटऑफ घटाने का मतलब यह नहीं कि डॉक्टर अयोग्य होंगे। अंतिम चयन के बाद भी ट्रेनिंग, परीक्षा और निगरानी की कई परतें होती हैं।”

बड़ा सवाल

जनमानस में एक तीखा सवाल भी गूंज रहा है—

“क्या हमारे नेता या नीति-निर्माता ‘माइनस अंक’ वाले डॉक्टर से इलाज कराएंगे?”

सरकार और नियामक संस्थाओं की भूमिका

स्वास्थ्य शिक्षा से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह कदम पारदर्शी प्रक्रिया के तहत लिया गया है और सभी अभ्यर्थियों को निर्धारित मानकों के अनुसार ही प्रवेश दिया जाएगा। उनका दावा है कि मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा।

विशेषज्ञ समीक्षा

NEET PG कटऑफ में बदलाव ने मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता, अवसर की समानता और निजी कॉलेजों की भूमिका पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

अब देखना यह है कि क्या यह निर्णय अस्थायी व्यवस्था है या भविष्य में भी इसी तरह की नीति अपनाई जाएगी।