वेबसाइट पर 'वर्ल्ड क्लास', ज़मीन पर 'बदहाल': भगवान बुद्ध की विश्राम स्थली 'घोड़धाप' प्रशासन की उपेक्षा का शिकार

अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर चमकाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर भगवान बुद्ध से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरें जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की लापरवाही के कारण अस्तित्व खो रही हैं।

वेबसाइट पर 'वर्ल्ड क्लास', ज़मीन पर 'बदहाल': भगवान बुद्ध की विश्राम स्थली 'घोड़धाप' प्रशासन की उपेक्षा का शिकार

कुशीनगर (बकुलहर कला): एक तरफ केंद्र और प्रदेश सरकार कुशीनगर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर चमकाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर भगवान बुद्ध से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरें जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की लापरवाही के कारण अस्तित्व खो रही हैं। फाजिलनगर ब्लॉक का बकुलहर कला (वेइली) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

वेबसाइट पर स्वर्ग, हकीकत में नरक

आश्चर्य की बात यह है कि कुशीनगर जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट (kushinagar.nic.in) पर इस स्थल को बड़े गर्व के साथ 'पर्यटन स्थल' के रूप में दर्ज किया गया है। वेबसाइट पर लिखित रूप में स्वीकार किया गया है कि:

यहाँ 52 बीघे का 'घोड़धाप' पोखरा स्थित है, जहाँ भगवान बुद्ध ने अपने अंतिम समय में भ्रमण किया था।

यहाँ 7 प्राचीन कुएं मौजूद हैं, जिनका जल स्वयं बुद्ध ने ग्रहण किया था।

यहाँ राजकीय उद्यान विभाग और वन विभाग की बड़ी पौधशालाएं (नर्सरी) मौजूद हैं।

लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि न तो उन 7 कुओं का संरक्षण हुआ, न ही इस विशाल पोखरे का सुंदरीकरण। वेबसाइट पर तो इसे 'ऐतिहासिक श्रेणी' में रखा गया है, लेकिन धरातल पर विदेशी पर्यटकों के बैठने तक की जगह नहीं है।

बुद्ध और आनंद का है यह पावन पड़ाव

इतिहासकारों और पालि साहित्य के अनुसार, पावा (फाजिलनगर) से कुशीनगर जाते समय भगवान बुद्ध अपने प्रिय शिष्य आनंद के साथ इसी बकुलहर कला में रुके थे। उन्होंने यहीं उपदेश दिए और रात्रि विश्राम किया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यहाँ वैज्ञानिक खुदाई (Archaeological Excavation) कराई जाए, तो मौर्य कालीन और बुद्ध काल के कई साक्ष्य मिल सकते हैं।

स्थानीय जनता में भारी आक्रोश

गाँव के युवाओं और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यहाँ पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं। उद्यान विभाग की दो-दो नर्सरी होने के बावजूद इसे 'इको-टूरिज्म' का केंद्र नहीं बनाया जा सका। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने कहा कि "वेबसाइट पर फोटो डालकर विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने का नाटक तो किया जा रहा है, लेकिन यहाँ की धूल और अतिक्रमण प्रशासन को दिखाई नहीं देता।"

प्रमुख मांगें:

बजट 2026 के तहत 'घोड़धाप पोखरा' को तत्काल अमृत सरोवर योजना में लेकर घाटों का निर्माण हो।

आधिकारिक वेबसाइट पर दर्ज 7 कुओं की खुदाई कर उन्हें संरक्षित किया जाए।

उद्यान विभाग की नर्सरी को बुद्ध शांति उपवन (Eco-Park) के रूप में विकसित किया जाए।

अगर समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो स्थानीय ग्रामीण आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।