बंगाल और तमिलनाडु में लोकतंत्र का महापर्व, टूटे आजादी के बाद के सभी रिकॉर्ड
चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मतदान का प्रतिशत अभूतपूर्व रहा
नई दिल्ली/कोलकाता/चेन्नई: भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के पहले चरण में मतदाताओं ने भारी उत्साह दिखाते हुए आजादी के बाद का सबसे अधिक मतदान दर्ज किया है।
मुख्य आँकड़े और रिकॉर्ड
चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मतदान का प्रतिशत अभूतपूर्व रहा:
पश्चिम बंगाल: यहाँ 152 सीटों पर रिकॉर्ड 92.56% मतदान हुआ। कूचबिहार जिला 95.47% वोटिंग के साथ सबसे आगे रहा।
तमिलनाडु: सभी 234 सीटों पर एक साथ मतदान हुआ, जहाँ कुल 85.13% वोट पड़े। करूर जिला 92.62% मतदान के साथ राज्य में शीर्ष पर रहा।
महिलाओं ने मारी बाजी
इस चुनाव की सबसे बड़ी विशेषता महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही। दोनों ही राज्यों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा:
तमिलनाडु: महिलाएं (85.76%) बनाम पुरुष (83.57%)
पश्चिम बंगाल: महिलाएं (92.69%) बनाम पुरुष (90.92%)
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
भारी मतदान को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष ने अपनी-अपनी जीत के दावे किए हैं:
प्रधानमंत्री मोदी: उन्होंने कहा कि बंगाल में भारी मतदान बदलाव का संकेत है। जनता खुद चुनाव लड़ रही है और भ्रष्ट शासन को उखाड़ फेंकने के लिए तैयार है।
ममता बनर्जी: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे तृणमूल के पक्ष में 'बंपर मतदान' बताया और कहा कि लोग अपना हक बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।
सुरक्षा और चुनौतियां
इतने बड़े स्तर पर चुनाव होने के बावजूद कुछ छिटपुट हिंसा की खबरें भी सामने आईं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बंगाल में हुई हिंसक घटनाओं पर रिपोर्ट मांगी है। चुनाव आयोग को लगभग 1403 शिकायतें मिलीं, जिनमें से अधिकतर ईवीएम में खराबी और सुरक्षा बलों के व्यवहार से जुड़ी थीं।
"मैं तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के हर मतदाता को सलाम करता हूँ जिन्होंने इस ऐतिहासिक मतदान को सफल बनाया।"
— ज्ञानेश कुमार, मुख्य चुनाव आयुक्त
अगला चरण: पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को निर्धारित है, जहाँ प्रशासन ने सुरक्षा के और भी कड़े इंतजाम करने का भरोसा दिया है।