बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर: क्या निशांत कुमार होंगे नीतीश के उत्तराधिकारी? जानें कौन बनेगा अगला सीएम
निशांत कुमार की एंट्री और राज्यसभा की दावेदारी
पटना | 4 मार्च, 2026
बिहार की सियासत में एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जो अब तक 'परिवारवाद' के कट्टर विरोधी माने जाते रहे हैं, उनके बेटे निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री लगभग तय मानी जा रही है। जदयू (JD-U) के वरिष्ठ नेताओं के बयानों और पटना की सड़कों पर लगे पोस्टरों ने इस चर्चा को हवा दे दी है कि क्या बिहार को जल्द ही नया नेतृत्व मिलने वाला है।
निशांत कुमार की एंट्री और राज्यसभा की दावेदारी
खबरों के अनुसार, होली के शुभ अवसर पर निशांत कुमार औपचारिक रूप से जदयू में शामिल हो सकते हैं। चर्चा यह भी है कि पार्टी उन्हें राज्यसभा भेज सकती है। जदयू कोटे से खाली हो रही सीटों के लिए निशांत का नाम सबसे आगे चल रहा है। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने संकेत दिया है कि पार्टी कार्यकर्ता लंबे समय से निशांत को राजनीति में लाने की मांग कर रहे थे, जिसे अब नेतृत्व ने हरी झंडी दे दी है।
अगला मुख्यमंत्री कौन? इन नामों पर टिकी हैं निगाहें
नीतीश कुमार के 75 वर्ष के होने और स्वास्थ्य संबंधी अटकलों के बीच 'अगला सीएम कौन?' का सवाल गहरा गया है। रेस में फिलहाल ये नाम सबसे प्रमुख हैं:
निशांत कुमार (जदयू): नीतीश कुमार के बेटे होने के नाते उन्हें स्वाभाविक उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि वे अब तक राजनीति से दूर रहे हैं, लेकिन पार्टी का एक बड़ा धड़ा उन्हें भविष्य के नेता के तौर पर प्रोजेक्ट कर रहा है।
सम्राट चौधरी (भाजपा): वर्तमान डिप्टी सीएम और भाजपा के कद्दावर नेता। एनडीए गठबंधन में भाजपा की बढ़ती ताकत को देखते हुए उनकी दावेदारी बेहद मजबूत मानी जा रही है।
तेजस्वी यादव (राजद): विपक्ष के सबसे मजबूत चेहरे और पूर्व डिप्टी सीएम। 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद से ही तेजस्वी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। अगर गठबंधन की गणित बिगड़ती है, तो वे सबसे बड़े दावेदार होंगे।
नितिन नबीन (भाजपा): भाजपा ने उन्हें राज्यसभा भेजकर संकेत दिया है कि वे राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी भूमिका निभाएंगे, लेकिन बिहार की आंतरिक राजनीति में उनका प्रभाव कम नहीं है।
सियासी समीकरण और चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि निशांत कुमार की एंट्री जदयू को एकजुट रखने की एक कोशिश हो सकती है। लेकिन 'परिवारवाद' का ठप्पा नीतीश कुमार की छवि पर सवाल खड़े कर सकता है, जिसका फायदा विपक्ष उठा सकता है। दूसरी ओर, भाजपा भी बिहार में अपना मुख्यमंत्री देखने की महात्वाकांक्षा रखती है, ऐसे में एनडीए के भीतर सीट शेयरिंग और नेतृत्व को लेकर खींचतान बढ़ सकती है।
"निशांत कुमार एक शिक्षित इंजीनियर हैं और उनमें नीतीश जी जैसी ही सादगी और गंभीरता है। बिहार की युवा पीढ़ी उन्हें नेतृत्व करते देखना चाहती है।" - अशोक चौधरी, मंत्री (बिहार सरकार)
निष्कर्ष:
बिहार की राजनीति 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है। राज्यसभा चुनावों के नामांकन और होली के बाद की राजनीतिक नियुक्तियां यह साफ कर देंगी कि नीतीश कुमार की विरासत किसके हाथ में जाएगी।