घिरे डोनाल्ड ट्रंप: 70 से ज्यादा सांसदों ने खोला मोर्चा, इस्तीफे की उठी मांग
बुधवार को डेमोक्रेटिक पार्टी के 70 से अधिक सांसदों ने एक सुर में ट्रंप के इस्तीफे की मांग की है।
वॉशिंगटन | ईरान के साथ बढ़ते तनाव और युद्ध की आशंकाओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ट्रंप अब अपनों के ही निशाने पर आ गए हैं। बुधवार को डेमोक्रेटिक पार्टी के 70 से अधिक सांसदों ने एक सुर में ट्रंप के इस्तीफे की मांग की है। सांसदों का तर्क है कि देश की आंतरिक सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति के लिए ट्रंप का पद पर बने रहना अब सुरक्षित नहीं है।
विपक्ष का तीखा हमला: 'मानसिक स्थिति' पर उठाए सवाल
अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी ने ट्रंप की ईरान नीति की कड़ी आलोचना करते हुए इसे 'पूर्ण समर्पण' करार दिया है। सांसदों का आरोप है कि युद्ध को लेकर राष्ट्रपति का रुख बार-बार बदल रहा है, जिससे उनकी रणनीति में स्पष्टता की कमी झलकती है। इसके अलावा, विपक्षी सांसदों ने राष्ट्रपति की अभद्र भाषा और उनकी मानसिक स्थिति पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
भारतीय मूल के सांसद रो खन्ना ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ट्रंप को पद से हटाना अब अनिवार्य हो गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर ट्रंप द्वारा एक पूरी सभ्यता को मिटा देने की धमकी को गैर-जिम्मेदाराना बताया।
क्या हैं ट्रंप को हटाने के कानूनी रास्ते?
अमेरिकी संविधान के जानकारों और विपक्षी सांसदों के अनुसार, राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए दो प्रमुख संवैधानिक विकल्प मौजूद हैं:
महाभियोग (Impeachment): हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स द्वारा आरोप लगाए जाने के बाद सीनेट में दो-तिहाई बहुमत से दोषसिद्धि होने पर राष्ट्रपति को हटाया जा सकता है।
25वां संविधान संशोधन: इस प्रावधान के तहत यदि उपराष्ट्रपति और कैबिनेट के अधिकांश सदस्य यह मानते हैं कि राष्ट्रपति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में असमर्थ हैं, तो वे उन्हें अयोग्य घोषित कर सकते हैं। इसके बाद उपराष्ट्रपति तुरंत कार्यवाहक राष्ट्रपति का कार्यभार संभाल लेते हैं।
मुख्य बिंदु:
ईरान युद्ध की रणनीति को लेकर ट्रंप की चौतरफा घेराबंदी।
70 से अधिक सांसदों ने लिखित में मांगा इस्तीफा।
सीनेटर क्रिस मर्फी और रो खन्ना ने '25वें संशोधन' के इस्तेमाल की वकालत की।
सोशल मीडिया पर दी गई धमकियों को बताया गया 'अशोभनीय'।
इस राजनीतिक उठापटक ने अमेरिका की आंतरिक राजनीति में भूचाल ला दिया है। अब देखना यह होगा कि व्हाइट हाउस इन गंभीर आरोपों और इस्तीफे की मांग पर क्या प्रतिक्रिया देता है।