NH-28 पर धुएं का तांडव: कूड़े की आग ने हाईवे को बनाया 'मौत का रास्ता', आपस में टकराए कई वाहन, बच्चे भी शिकार!
सड़क किनारे सुलग रहे कूड़े के धुएं ने चंद सेकंड में हंसते-खेलते परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दिया।
कुशीनगर (फाजिलनगर)।
कुछ मिनट की लापरवाही… और हाईवे पर मौत बनकर छा गया धुएं का गुबार! कुशीनगर जनपद के फाजिलनगर क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-28 (NH-28) पर एक ऐसा भीषण सड़क हादसा सामने आया है, जिसने प्रशासनिक मुस्तैदी और मानवीय जिम्मेदारी के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। सड़क किनारे सुलग रहे कूड़े के धुएं ने चंद सेकंड में हंसते-खेलते परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दिया।
कैसे हुआ हादसा? (आंखों देखी)
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, फाजिलनगर क्षेत्र के विपरार अजब के समीप किसी अज्ञात शख्स ने सड़क किनारे डंप किए गए कूड़े के ढेर में आग लगा दी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और उससे निकला घना, काला धुआँ पूरे हाईवे पर पसर गया।
शून्य हुई विजिबिलिटी: हाईवे पर अचानक विजिबिलिटी (दृश्यता) जीरो हो गई।
वाहनों की टक्कर: तेज रफ्तार से आ रहे वाहन चालकों को सामने कुछ भी दिखाई देना बंद हो गया, जिसके चलते एक के बाद एक कई गाड़ियां आपस में टकराती चली गईं।
चीख-पुकार का मंजर: हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। सड़क पर बिखरा सामान, टूटे हुए वाहन और घायल लोगों की कराह से पूरा इलाका दहल उठा।
चश्मदीदों की बहादुरी: दुर्घटना होते ही स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े। अपनी जान जोखिम में डालकर ग्रामीणों ने जलते धुएं के बीच से घायलों और फँसे हुए लोगों को गाड़ियों से बाहर निकाला।
मासूम बच्चे भी बने शिकार, कई गंभीर
बताया जा रहा है कि इस दर्दनाक हादसे में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। बेहद दुखद बात यह है कि इस दुर्घटना का शिकार कुछ मासूम बच्चे भी हुए हैं। घायलों को नजदीकी अस्पताल भिजवाया गया है, जहाँ कई की हालत नाजुक बनी हुई है। इस लापरवाही ने कई परिवारों को उम्र भर का दर्द दे दिया है।
बड़े सवाल: आखिर आम इंसान की जान इतनी सस्ती क्यों?
यह हादसा सिर्फ एक 'एक्सीडेंट' नहीं, बल्कि सिस्टम की घोर लापरवाही का नतीजा है। 'न्यूज पोर्टल' प्रशासन और जिम्मेदार विभागों से सीधे ये सवाल पूछता है:
इजाजत किसने दी? NH-28 जैसे व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे खुलेआम कूड़ा डंप करने और उसमें आग लगाने की छूट किसने दी?
पुरानी घटनाओं से सबक क्यों नहीं? स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस मार्ग पर पहले भी धुएं के कारण छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं। फिर भी नेशनल हाईवे अथॉरिटी और स्थानीय प्रशासन आंखें बंद करके क्यों बैठा रहा?
दोषियों पर कार्रवाई कब? सार्वजनिक स्थान और एक्सप्रेसवे/हाईवे के किनारे आग लगाना कानूनी अपराध है, तो अब तक दोषियों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई?