अंतरराष्ट्रीय बुद्धिस्ट कॉन्क्लेव में गूंजा शांति का संदेश
कॉन्क्लेव के तृतीय दिवस पर आयोजित विशेष पैनल चर्चा का मुख्य विषय “युद्ध के समय में बुद्ध की प्रासंगिकता” रहा।
कुशीनगर | वर्तमान वैश्विक अशांति और युद्ध की विभीषिका के बीच भगवान बुद्ध की शिक्षाएं आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गई हैं। कुशीनगर के महापरिनिर्वाण मुख्य मंदिर परिसर में चल रहे अंतरराष्ट्रीय बुद्धिस्ट कॉन्क्लेव-2026 के तीसरे दिन शनिवार को इसी महत्वपूर्ण विषय पर विमर्श हुआ।
"युद्ध के समय में बुद्ध की प्रासंगिकता" पर गहन मंथन
कॉन्क्लेव के तृतीय दिवस पर आयोजित विशेष पैनल चर्चा का मुख्य विषय “युद्ध के समय में बुद्ध की प्रासंगिकता” रहा। इस सत्र में भारत समेत कई देशों के बौद्ध भिक्षुओं, प्रकांड विद्वानों और शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
चर्चा के मुख्य बिंदु:
मध्यम मार्ग की आवश्यकता: वक्ताओं ने जोर दिया कि जब दुनिया परमाणु शक्ति और हथियारों की होड़ में फंसी है, तब बुद्ध का 'मध्यम मार्ग' ही मानवता को विनाश से बचा सकता है।
संवाद से समाधान: विद्वानों ने तर्क दिया कि युद्ध कभी भी स्थायी शांति नहीं ला सकता। स्थायी समाधान केवल धैर्य, करुणा और निरंतर संवाद (Dialogue) के माध्यम से ही संभव है।
सामाजिक समरसता: बुद्ध के विचार केवल आध्यात्मिक शांति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे वैश्विक शांति और सामाजिक भाईचारे के लिए एक मजबूत ब्लूप्रिंट प्रदान करते हैं।
कुशीनगर: विश्व शांति का वैश्विक केंद्र
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित फाजिलनगर विधायक सुरेंद्र सिंह कुशवाहा ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया। उन्होंने कुशीनगर की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा:
"भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली होने के नाते कुशीनगर पूरे विश्व के लिए शांति का केंद्र है। इस तरह के आयोजनों से न केवल जनपद की अंतरराष्ट्रीय पहचान सुदृढ़ होती है, बल्कि पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और निवेश के नए द्वार भी खुलते हैं।"
विधायक ने विशेष रूप से युवाओं से आह्वान किया कि वे अहिंसा और करुणा को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं ताकि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके।
श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं का उत्साह
इस सत्र ने कॉन्क्लेव के आकर्षण को दोगुना कर दिया। प्रश्नोत्तर काल के दौरान श्रोताओं ने युद्धग्रस्त क्षेत्रों में बौद्ध दर्शन के अनुप्रयोग को लेकर कई गंभीर प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से उत्तर दिया।