सावधान! आपका पुराना खराब मोबाइल बन सकता है 'साइबर ठगी का हथियार

Apr 16, 2026 - 09:06
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सावधान! आपका पुराना खराब मोबाइल बन सकता है 'साइबर ठगी का हथियार

नई दिल्ली: अगर आप भी अपने घर का पुराना या खराब हो चुका मोबाइल फोन गली में फेरी लगाने वालों को चंद प्लास्टिक के डिब्बों या कुर्सियों के बदले दे देते हैं, तो सावधान हो जाइए। आपकी यह छोटी सी लापरवाही आपको किसी बड़े साइबर अपराध का शिकार बना सकती है या अनजाने में आपको किसी अपराधी का मददगार बना सकती है।

हाल ही में हुई पुलिस कार्रवाई और साइबर विशेषज्ञों के खुलासे से एक चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आया है, जहां कबाड़ हो चुके मोबाइल फोनों का इस्तेमाल 'डिजिटल अरेस्ट' और 'साइबर ठगी' के लिए किया जा रहा है।

???? कैसे होता है 'कबाड़' से ठगी का खेल?

फेरी लगाने वाले लोग गांव-कस्बों और गलियों में घूमकर छोटे मोबाइल के बदले छोटा टब और बड़े मोबाइल के बदले कुर्सी या बड़ा टब देने का लालच देते हैं। ये एकत्रित किए गए पुराने फोन सीधे साइबर अपराधियों के पास पहुँचते हैं।

ठग इन फोनों का दो तरह से इस्तेमाल करते हैं:

कस्टमाइज्ड फोन बनाना: साइबर ठग पुराने फोनों के सही पार्ट्स (जैसे मदरबोर्ड या डिस्प्ले) को निकालकर नए 'कस्टमाइज्ड' फोन तैयार करते हैं। इन फोनों में विशेष सॉफ्टवेयर लोड किए जाते हैं ताकि इनकी लोकेशन ट्रेस न हो सके।

डाटा रिकवरी: सबसे खतरनाक बात यह है कि खराब पड़े फोन की मेमोरी में अक्सर आपका पर्सनल डाटा (फोटो, वीडियो, बैंकिंग जानकारी) सुरक्षित रहता है। वेंडर इसे रिकवर कर साइबर ठगों को मोटी कीमत पर बेच देते हैं।

????️ तकनीकी पैंतरे: सिम लॉगर और VPN का मायाजाल

साइबर विशेषज्ञ अमित शर्मा के अनुसार, अपराधी इन फोनों में VPN और सिम लॉगर (Sim Logger) जैसी तकनीकों का प्रयोग करते हैं।

सिम लॉगर: इसके जरिए एक ही डिवाइस में एक साथ कई सिम कार्ड एक्टिव रखे जा सकते हैं।

IMEI छिपाना: कस्टमाइज्ड फोन होने की वजह से पुलिस के लिए इनका IMEI नंबर ट्रेस करना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

???? जामताड़ा की तर्ज पर चल रहा है 'कोडवर्ड' गैंग

उत्तर प्रदेश के घाटमपुर में पुलिस ने हाल ही में ड्रोन की मदद से बड़ी छापेमारी कर 20 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि ये गैंग झारखंड के जामताड़ा की तरह ही सक्रिय है।

रैंक और कोडवर्ड: गैंग में अपराधी की हैसियत उसके फोन के कोडवर्ड से तय होती है। नए प्रशिक्षुओं को कीपैड वाला फोन दिया जाता है, जबकि मास्टरमाइंड को 'वीडियो कॉल' और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे बड़े अपराधों के लिए एडवांस कस्टमाइज्ड फोन मिलते हैं।

???? खुद को कैसे सुरक्षित रखें?

कबाड़ में न दें फोन: कभी भी अपना पुराना मोबाइल किसी अनजान फेरी वाले को न बेचें।

डाटा डिस्ट्रॉय करें: फोन फेंकने या बेचने से पहले उसे 'फैक्ट्री रिसेट' करें और संभव हो तो उसकी मेमोरी चिप को पूरी तरह नष्ट कर दें।

ई-वेस्ट सेंटर: अपना पुराना इलेक्ट्रॉनिक सामान केवल अधिकृत ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग केंद्रों पर ही जमा करें।

याद रखें, आपके पुराने फोन का एक छोटा सा पुर्जा किसी की जिंदगी भर की कमाई लूटने का जरिया बन सकता है। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें!