SI परीक्षा के प्रश्नपत्र पर बवाल: 'पंडित' शब्द से जुड़े सवाल पर भड़के अभ्यर्थी, सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग
कुशीनगर l Newslive31 (SI) भर्ती परीक्षा का एक प्रश्न अब विवादों का केंद्र बन गया है। सामान्य हिंदी/सामान्य ज्ञान के प्रश्नपत्र में 'पंडित' शब्द के अर्थ या उसके प्रयोग से संबंधित एक बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) को लेकर सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक घमासान शुरू हो गया है।
विवाद की जड़: क्या था वो सवाल?
खबरों के मुताबिक, परीक्षा में एक प्रश्न पूछा गया था जिसमें 'पंडित' शब्द की परिभाषा या उसके पर्यायवाची/विलोम के चयन को लेकर विकल्प दिए गए थे। अभ्यर्थियों और कुछ सामाजिक संगठनों का आरोप है कि प्रश्न की शब्दावली या दिए गए विकल्प जातिगत भावनाओं को आहत करने वाले या तथ्यात्मक रूप से अपमानजनक हैं।
विवाद के मुख्य कारण:
विकल्पों का चयन: आरोप है कि प्रश्न के उत्तर के लिए दिए गए विकल्प तार्किक होने के बजाय अपमानजनक श्रेणी में आते हैं।
धार्मिक और सामाजिक भावनाएं: कई संगठनों का कहना है कि एक सरकारी परीक्षा में इस तरह के संवेदनशील शब्दों का प्रयोग सावधानी से किया जाना चाहिए था।
सिलेबस से बाहर: कुछ छात्रों का दावा है कि यह व्याकरण का प्रश्न नहीं बल्कि जानबूझकर विवाद पैदा करने वाला सवाल है।
सोशल मीडिया पर 'डिजिटल युद्ध'
जैसे ही प्रश्नपत्र की फोटो वायरल हुई, इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है।
विरोध पक्ष: "एक गरिमामय पद (Sub-Inspector) की परीक्षा में इस तरह के जातिसूचक या वर्ग विशेष को लक्षित करने वाले प्रश्न क्यों?"
तर्क पक्ष: कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल हिंदी व्याकरण (संज्ञा या जातिवाचक शब्द) का एक सामान्य प्रश्न था, जिसे गलत संदर्भ में लिया जा रहा है।
"परीक्षा का स्तर प्रशासनिक होना चाहिए, न कि ऐसा जिससे समाज के किसी भी वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचे। हम इस प्रश्न को हटाए जाने की मांग करते हैं।" — एक अभ्यर्थी का सोशल मीडिया पोस्ट
भर्ती बोर्ड की सफाई का इंतज़ार
इस पूरे विवाद पर पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है। सूत्रों की मानें तो विशेषज्ञों की एक कमेटी इस प्रश्न की समीक्षा कर रही है। यदि प्रश्न वाकई विवादित पाया जाता है, तो उसे 'निरस्त' (Full Marks) घोषित किया जा सकता है।
राजनीतिक रंग लेता विवाद
मामला अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा। कई स्थानीय नेताओं ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है और इसे 'सोची-समझी साजिश' या 'प्रशासनिक लापरवाही' करार दिया है। विपक्षी दलों ने मांग की है कि पेपर सेट करने वाले पैनल पर कार्रवाई की जाए।