महँगाई की दोहरी मार: गैस सिलेंडर की किल्लत और खाने-पीने की चीज़ों के बढ़ते दाम, आम आदमी बेहाल

महँगाई की दोहरी मार: गैस सिलेंडर की किल्लत और खाने-पीने की चीज़ों के बढ़ते दाम, आम आदमी बेहाल

Mar 21, 2026 - 09:04
Mar 21, 2026 - 09:09
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महँगाई की दोहरी मार: गैस सिलेंडर की किल्लत और खाने-पीने की चीज़ों के बढ़ते दाम, आम आदमी बेहाल

नई दिल्ली/डेस्क: देश के कई हिस्सों में इन दिनों आम जनता पर महँगाई का 'डबल अटैक' हुआ है। एक तरफ जहाँ रसोई गैस (LPG) सिलेंडर की आपूर्ति में आ रही दिक्कतों ने चूल्हा जलाना मुश्किल कर दिया है, वहीं दूसरी ओर खाने-पीने की ज़रूरी वस्तुओं की कीमतों में आए उछाल ने थाली का स्वाद बिगाड़ दिया है।

गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारें, ब्लैक में मिल रहे दाम

पिछले कुछ हफ्तों से गैस सिलेंडरों की किल्लत (Shortage) की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। बुकिंग के कई दिनों बाद भी सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हो पा रही है। स्थिति यह है कि:

सप्लाई चेन प्रभावित: वितरण केंद्रों पर घंटों इंतज़ार के बाद भी उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

कालाबाज़ारी का डर: किल्लत का फायदा उठाकर कुछ क्षेत्रों में सिलेंडर को ऊंचे दामों पर बेचे जाने की शिकायतें मिल रही हैं।

होटल और ढाबे प्रभावित: कमर्शियल गैस की किल्लत और कीमतों के कारण बाहर का खाना भी अब जेब पर भारी पड़ रहा है।

थाली से गायब हो रही है रंगत

गैस की किल्लत के साथ-साथ खाद्य पदार्थों की कीमतों ने भी आग लगा दी है। ढुलाई (Logistics) की लागत बढ़ने और स्थानीय बाजारों में स्टॉक की कमी के चलते सब्जियाँ, दालें और खाद्य तेल 10% से 20% तक महंगे हो गए हैं।

"सुबह उठते ही चिंता शुरू हो जाती है। सिलेंडर कब आएगा पता नहीं, और बाज़ार जाओ तो हर चीज़ के दाम आसमान छू रहे हैं। समझ नहीं आता कि घर का बजट कैसे संभालें।"

— सुनीता वर्मा, गृहिणी

प्रशासन की चुप्पी और बढ़ता आक्रोश

इस संकट को लेकर आम जनता में खासा रोष है। लोगों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को इस दिशा में कड़े कदम उठाने चाहिए ताकि कालाबाज़ारी रुके और सप्लाई चेन को दुरुस्त किया जा सके। जानकारों का मानना है कि यदि जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो खाने-पीने की चीज़ों के दाम अभी और बढ़ सकते हैं।