ट्रंप का 'मिशन ईरान' फेल? 10 दिन में 10 अरब डॉलर स्वाहा, अब 'बैकफुट' पर व्हाइट हाउस; समझिए क्या है पूरा गेम प्लान
वॉल स्ट्रीट जर्नल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के टॉप मिलिट्री और पॉलिटिकल एडवाइजर्स ने उन्हें साफ चेतावनी दी है।
वॉशिंगटन/मिड-ईस्ट की जंग अब उस मोड़ पर आ गई है जहाँ दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश 'सुलह' का रास्ता तलाश रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो 10 दिन पहले तक ईरान को नक्शे से मिटाने की बात कर रहे थे, अब उनके सुर बदले-बदले नजर आ रहे हैं। मंगलवार (10 मार्च) को ट्रंप का यह कहना कि "युद्ध अब आखिरी दौर में है", महज एक बयान नहीं बल्कि अमेरिकी मजबूरी की कहानी बयां कर रहा है।
1. सलाहकारों की चेतावनी: "फायदा कम, नुकसान ज्यादा"
वॉल स्ट्रीट जर्नल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के टॉप मिलिट्री और पॉलिटिकल एडवाइजर्स ने उन्हें साफ चेतावनी दी है। सलाहकारों का तर्क है कि ईरान के साथ इस जंग को खींचना अमेरिका के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।
-
मिडटर्म इलेक्शन का डर: इसी साल के अंत में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने हैं। सलाहकारों का मानना है कि लंबी जंग से ट्रंप का 'कोर वोटर' छिटक सकता है। अमेरिकी जनता अब एक और 'अंतहीन युद्ध' (Endless War) के पक्ष में नहीं है।
2. तख्तापलट का सपना टूटा, खुफिया रिपोर्ट ने खोली पोल
अमेरिका का शुरुआती प्लान ईरान में सत्ता परिवर्तन (Regime Change) का था। इसके लिए दूसरे ही दिन सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और टॉप-40 कमांडरों को निशाना बनाया गया। लेकिन पासा उल्टा पड़ गया:
-
जनता का साथ नहीं मिला: एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, नेशनल इंटेलिजेंस काउंसिल की रिपोर्ट कहती है कि शीर्ष नेतृत्व की मौत के बावजूद ईरान की जनता सड़कों पर विद्रोह के लिए नहीं उतरी, बल्कि राष्ट्रवाद के नाम पर और एकजुट हो गई।
3. 'डॉलर' की मार: 10 दिन में 82,000 करोड़ रुपये खाक!
युद्ध की इकोनॉमी अमेरिका की कमर तोड़ रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो ये आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
-
शुरुआती 48 घंटे: 5.6 बिलियन डॉलर का गोला-बारूद इस्तेमाल।
-
10 दिन का कुल खर्च: 10 बिलियन डॉलर (लगभग 828 अरब भारतीय रुपये) से ज्यादा।
-
वाशिंगटन पोस्ट और अनादोलु एजेंसी के मुताबिक, बिना किसी ठोस सैन्य लाभ के इतनी बड़ी रकम खर्च करना अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए 'रेड सिग्नल' है।
4. घरेलू मोर्चे पर घिरे ट्रंप: सर्वे ने बढ़ाई टेंशन
Quinnipiac University के नए सर्वे ने व्हाइट हाउस की नींद उड़ा दी है:
-
53% अमेरिकी नागरिक ईरान पर हमले के खिलाफ हैं।
-
44% नागरिकों का मानना है कि अमेरिका इजराइल के चक्कर में जरूरत से ज्यादा आगे निकल गया है।
-
विदेश मंत्री मार्को रुबियो का यह बयान कि "इजराइल की वजह से हमला किया", ट्रंप प्रशासन के लिए गले की फांस बन गया है।
ईरान का पलटवार: "प्लान-बी भी होगा फेल"
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दो टूक कहा है कि अमेरिका का 'प्लान-ए' (तख्तापलट) बुरी तरह नाकाम रहा है। अराघची के मुताबिक, "अमेरिका अब 'प्लान-बी' के जरिए अपनी इज्जत बचाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसे यहाँ भी शिकस्त मिलेगी।"