सेहत के लिए कौन सा दूध बेहतर लो-फैट या फुल-फैट
दूध को सेहत के लिए एक कम्प्लीट फ़ूड माना जाता है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, फ़ॉस्फ़ोरस, पोटैशियम, विटामिन A, D, B12 और अच्छी मात्रा में एनर्जी होती है, जो हड्डियों, मसल्स और इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाने में मदद करता है। बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक, सभी को रोज़ाना दूध पीने की सलाह दी जाती है।
दूध को सेहत के लिए एक कम्प्लीट फ़ूड माना जाता है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, फ़ॉस्फ़ोरस, पोटैशियम, विटामिन A, D, B12 और अच्छी मात्रा में एनर्जी होती है, जो हड्डियों, मसल्स और इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाने में मदद करता है। बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक, सभी को रोज़ाना दूध पीने की सलाह दी जाती है। दूध न सिर्फ़ शरीर को पोषण देता है बल्कि थकान कम करने और रिकवरी में भी मदद करता है। बाज़ार में दूध के कई ऑप्शन मौजूद हैं, लेकिन लो-फ़ैट और फ़ुल-फ़ैट दूध सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं। लोग अक्सर यह तय करने में मुश्किल महसूस करते हैं कि उनके रोज़ाना के खाने के लिए कौन सा दूध सबसे अच्छा है।
कुछ लोग वज़न बढ़ने के डर से लो-फ़ैट दूध चुनते हैं, जबकि दूसरे बेहतर स्वाद और पोषण को प्राथमिकता देते हुए फ़ुल-फ़ैट दूध चुनते हैं। इससे यह सवाल उठता है कि सेहत के लिए असल में कौन सा दूध सबसे अच्छा है। इसका जवाब हर व्यक्ति की उम्र, लाइफ़स्टाइल और शरीर की ज़रूरतों पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं।
लो-फ़ैट और फ़ुल-फ़ैट दूध में क्या अंतर है?
RML हॉस्पिटल में मेडिसिन डिपार्टमेंट के डायरेक्टर प्रोफ़ेसर डॉ. सुभाष गिरी बताते हैं कि फ़ुल-फ़ैट दूध नैचुरल दूध के सबसे करीब होता है, जिसमें से क्रीम नहीं निकाली जाती। इसमें फैट ज़्यादा होता है, जिससे यह क्रीमी और एनर्जी से भरपूर होता है। यह दूध बच्चों, जवान लोगों और उन लोगों के लिए फायदेमंद माना जाता है जिन्हें ज़्यादा कैलोरी और न्यूट्रिशन की ज़रूरत होती है।
दूसरी ओर, लो-फैट दूध फुल-फैट दूध से ज़्यादातर क्रीम हटाकर बनाया जाता है। इसमें फैट कम होता है, लेकिन प्रोटीन और कैल्शियम जैसे ज़रूरी न्यूट्रिएंट्स बने रहते हैं। लो-फैट दूध वज़न कंट्रोल और दिल की सेहत के लिए बेहतर माना जाता है। दोनों दूध न्यूट्रिशन देते हैं, बस फैट और कैलोरी का फर्क होता है, जिनका शरीर पर अलग-अलग असर होता है।
कौन सा दूध कब चुनें?
अगर आप वज़न कम करने की कोशिश कर रहे हैं या आपको दिल की समस्याओं का खतरा है, तो लो-फैट दूध एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है। यह शरीर को बिना ज़्यादा फैट के ज़रूरी न्यूट्रिएंट्स देता है। वहीं, बच्चे, टीनएजर, प्रेग्नेंट महिलाएं या जो लोग फिजिकल एक्टिविटी करते हैं, वे फुल-फैट दूध चुन सकते हैं, क्योंकि इससे उन्हें ज़्यादा एनर्जी और फैट में घुलने वाले विटामिन मिलते हैं।
बड़े लोगों और कम एक्टिव लाइफस्टाइल वाले लोगों को अपनी सेहत के हिसाब से दूध चुनना चाहिए। कुल मिलाकर, जो दूध आपके शरीर के लिए सबसे अच्छा है, वही सही है।
यह जानना भी ज़रूरी है:
दूध तभी फ़ायदेमंद होता है जब उसे कम मात्रा में पिया जाए। बहुत ज़्यादा फ़ुल-फ़ैट दूध पीने से वज़न बढ़ सकता है, जबकि बहुत ज़्यादा लो-फ़ैट दूध पीने से कुछ लोगों में कमज़ोरी आ सकती है। इसके अलावा, दूध पीने की क्वालिटी, ताज़गी और समय भी मायने रखता है।
अगर किसी को लैक्टोज़ इनटॉलेरेंस या पाचन की समस्या है, तो डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है। इसलिए, दूध चुनते समय, सिर्फ़ फ़ैट की मात्रा ही नहीं, बल्कि अपनी पूरी सेहत का भी ध्यान रखना चाहिए।
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