इसरो ने अंतरिक्ष में स्थापित किया तीसरा नेत्र — 'आई ऑन द स्काई' का सफल प्रक्षेपण
अंतरिक्ष एजेंसी ने देश के पहले अत्याधुनिक 'जियो-ऑर्बिट इमेजिंग सैटेलाइट' (EOS-05) का सफल प्रक्षेपण कर एक नया मील का पत्थर हासिल किया है।
News Live31 l विशेष रिपोर्ट
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। अंतरिक्ष एजेंसी ने देश के पहले अत्याधुनिक 'जियो-ऑर्बिट इमेजिंग सैटेलाइट' (EOS-05) का सफल प्रक्षेपण कर एक नया मील का पत्थर हासिल किया है। इस महत्वपूर्ण मिशन को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से जीएसएलवी-एफ17 (GSLV-F17) रॉकेट के माध्यम से अंजाम दिया गया।
मिशन की मुख्य विशेषताएँ एवं तकनीकी विवरण:
ऐतिहासिक उड़ान और भारी पेलोड: जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट द्वारा लॉन्च किया गया यह उपग्रह लगभग 2,367 किलोग्राम वजनी है, जो इस जियोसिंक्रोनस लॉन्च व्हीकल द्वारा अंतरिक्ष में भेजा गया अब तक का सबसे भारी पेलोड है।
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट की खूबी: आम तौर पर भारत के अधिकांश अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट निचली कक्षाओं (LEO) में चक्कर लगाते हैं, लेकिन EOS-05 को लगभग 36 हजार किलोमीटर की ऊँचाई पर जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट (Geosynchronous Orbit) में स्थापित किया जा रहा है। इस ऊँचाई पर उपग्रह पृथ्वी की गति के साथ तालमेल बिठाकर लगातार एक निश्चित क्षेत्र पर नजर बनाए रख सकता है।
'आई ऑन द स्काई' (आसमान में भारत की आंख): अपनी इस विशिष्ट स्थिति और लगातार निगरानी रखने की अद्वितीय क्षमता के कारण इस अंतरिक्ष उपग्रह को रक्षा और अंतरिक्ष विशेषज्ञों द्वारा 'आसमान में भारत की आंख' उपनाम दिया गया है।
रणनीतिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में उपयोग:
सीमाओं की पैनी निगरानी: इस अत्याधुनिक इमेजिंग सैटेलाइट के अंतरिक्ष में सक्रिय होने से भारत को अपनी सीमाओं, विशेषकर पाकिस्तान और चीन सीमा सहित तमाम संवेदनशील और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखने में अभूतपूर्व मदद मिलेगी।
प्राकृतिक आपदाओं से मुकाबला: अंतरिक्ष से मिलने वाली इन रियल-टाइम तस्वीरों और डेटा का उपयोग बाढ़, चक्रवात, बादल फटने (क्लाउडबर्स्ट), जंगल की आग और अन्य गंभीर प्राकृतिक आपदाओं की सटीक निगरानी के लिए किया जाएगा। इससे समय रहते चेतावनी जारी करने और आपदा प्रबंधन व राहत कार्यों को तेजी से संचालित करने में मदद मिलेगी।
कृषि और संसाधन विकास: आपदा और सुरक्षा के अलावा, इस मिशन से मिलने वाले स्पेक्ट्रल सिग्नेचर कृषि, वानिकी (फॉरेस्ट्री) और जल संसाधनों के आकलन व विकास में भी बेहद मददगार साबित होंगे।
News Live31 इस गौरवशाली उपलब्धि पर देश के वैज्ञानिकों और इसरो की पूरी टीम को बधाई देता है। इस खबर से जुड़े अन्य अपडेट्स के लिए बने रहिए हमारे साथ।