​संघर्ष से सफलता तक: SDM सौम्या मिश्रा ने चौथे प्रयास में हासिल की UPSC में 18वीं रैंक

सौम्या की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे वर्षों का धैर्य और कड़ा परिश्रम है।

Feb 19, 2026 - 19:50
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​संघर्ष से सफलता तक: SDM सौम्या मिश्रा ने चौथे प्रयास में हासिल की UPSC में 18वीं रैंक

उत्तर प्रदेश के उन्नाव की रहने वाली सौम्या मिश्रा ने अपनी मेधा और दृढ़ संकल्प से एक बार फिर प्रदेश का नाम रोशन किया है। वर्तमान में मिर्जापुर के मड़िहान में उपजिलाधिकारी (SDM) के पद पर कार्यरत सौम्या ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में ऑल इंडिया 18वीं रैंक हासिल कर अपना आईएएस (IAS) बनने का सपना सच कर दिखाया है।

हार न मानने का जज्बा: चौथे प्रयास में मिली कामयाबी

सौम्या की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे वर्षों का धैर्य और कड़ा परिश्रम है।

शुरुआती चुनौतियाँ: इससे पहले की तीन कोशिशों में उन्हें असफलता का स्वाद चखना पड़ा। कभी वे प्रीलिम्स की बाधा पार नहीं कर पाईं, तो कभी इंटरव्यू की दहलीज पर आकर सपना टूट गया।

यूपी पीसीएस में परचम: हार मानने के बजाय उन्होंने खुद को तराशा और UPPCS 2021 की परीक्षा में पूरे प्रदेश में दूसरी रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

ड्यूटी के साथ पढ़ाई: 'बैलेंस' का बेहतरीन उदाहरण

एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में व्यस्त दिनचर्या और जनता की समस्याओं को हल करने के बीच यूपीएससी की तैयारी करना किसी चुनौती से कम नहीं था।

"ड्यूटी और पढ़ाई के बीच संतुलन बिठाने में तत्कालीन जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन का मार्गदर्शन मील का पत्थर साबित हुआ।"

सौम्या ने अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते हुए पढ़ाई के लिए समय निकाला, जो आज के समय में वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और शिक्षा

शिक्षा: सौम्या ने दिल्ली से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की है।

प्रेरणा: उनके पिता हिंदी के प्रोफेसर हैं, जिनसे उन्हें शिक्षा के प्रति गहरा लगाव और अनुशासन विरासत में मिला।

भावी आईएएस की अभ्यर्थियों को सलाह

अपनी सफलता से उत्साहित सौम्या ने अन्य यूपीएससी उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए हैं:

आत्म-विश्लेषण: असफलताओं से घबराने के बजाय अपनी गलतियों का गहराई से विश्लेषण करें।

धैर्य है कुंजी: सिविल सेवा की राह लंबी है, यहाँ आपकी मेहनत के साथ-साथ आपके धैर्य की भी परीक्षा होती है।

निरंतरता: पद पर रहते हुए भी अपने अंतिम लक्ष्य को ओझल न होने दें।