बेलवा कारखाना से बकुलहर कला मार्ग निर्माण में खुलेआम धांधली! कंक्रीट के ऊपर मोरंग की जगह डाली जा रही है ‘मिट्टी’, आखिर कौन है इस खेल का असली खिलाड़ी—ठेकेदार या जिम्मेदार अधिकारी?

नियमों को ताक पर रखकर हो रहा है घटिया सड़क निर्माण, जनता के टैक्स के पैसों की खुलेआम लूट

Sep 29, 2026 - 14:58
Sep 29, 2026 - 15:07
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बेलवा कारखाना से बकुलहर कला मार्ग निर्माण में खुलेआम धांधली! कंक्रीट के ऊपर मोरंग की जगह डाली जा रही है ‘मिट्टी’, आखिर कौन है इस खेल का असली खिलाड़ी—ठेकेदार या जिम्मेदार अधिकारी?

विशेष रिपोर्ट / न्यूज़ डेस्क

विकास के दावों की पोल खोलती एक तस्वीर इन दिनों क्षेत्र से सामने आ रही है, जहां जनता को बेहतर सड़क सुविधा देने के नाम पर सरकारी खजाने को चूना लगाने का खेल बेखौफ जारी है। मामला फाजिलनगर विकास खण्ड के बेलवा कारखाना से बकुलहर कला तक बन रही नई सड़क का है, जहां निर्माण कार्य के दौरान मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

इंजीनियरिंग और निर्माण के तय नियमों के मुताबिक सड़क की मजबूती के लिए कंक्रीट या उचित बेस लेयर के ऊपर मोरंग (कोर्स सैंड/बालू) या जीएसबी (GSB) का इस्तेमाल होना चाहिए था, ताकि सड़क टिकाऊ बने। लेकिन इसके विपरीत, मौके पर खुलेआम मोरंग की जगह मिट्टी डाली जा रही है। यह एक ऐसा गंभीर खेल है जो कुछ ही हफ्तों में इस सड़क को नेस्तनाबूद कर देगा और पहली ही बारिश में यह सड़क भ्रष्टाचार के गड्ढों में तब्दील हो जाएगी।

बड़ा सवाल: आखिर इस भ्रष्टाचार का जिम्मेदार कौन—ठेकेदार या अधिकारी?

इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय लोगों और जानकारों के बीच एक ही सवाल सबसे बड़ा है कि इस मनमानी और भ्रष्टाचार का असली गुनहगार कौन है?

क्या कसूरवार बेखौफ ठेकेदार है? जो ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर रहा है और जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहा है। ठेकेदार को शायद इस बात का पूरा भरोसा है कि उसकी पूछने वाला कोई नहीं है, क्योंकि उसकी पहुंच ऊपर तक है।

या फिर मिलीभगत करने वाले जिम्मेदार अधिकारी हैं? जो इस प्रोजेक्ट की देखरेख और मानिटरिंग के लिए सरकार से मोटी सैलरी लेते हैं। क्या बिना अधिकारियों की सहस और मिलीभगत के कोई ठेकेदार इतनी बड़ी धांधली करने की हिम्मत जुटा सकता है? यदि अधिकारी नियमित निरीक्षण कर रहे थे, तो उनकी नजरों से यह घटिया मिट्टी क्यों नहीं ओझल हुई?

जनता में उबाल, कभी भी फूट सकता है गुस्सा

सड़क निर्माण में हो रहे इस घटिया खेल को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी गुस्सा है। ग्रामीणों का कहना है कि नेताजी और अधिकारी बड़े-बड़े वादे तो विकास के करते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि कमीशनखोरी के चक्कर में सड़कों को कागजों पर ही दम तोड़वा दिया जाता है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले की उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई गई और काम में सुधार नहीं हुआ, तो वे सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।